नॉर्मल इन्वर्टर और हाइब्रिड इन्वर्टर, दोनों बिजली जाने पर घर की लाइट चालू रखते हैं। फ़र्क बाकी दिन का है। नॉर्मल इन्वर्टर बस बिजली जाने का इंतज़ार करता है। हाइब्रिड इन्वर्टर रोज़ आपके घर को सूरज की रोशनी से चलाता है और साथ में बिजली का बिल भी घटाता है।
नॉर्मल इन्वर्टर क्या करता है
नॉर्मल (या "होम UPS") इन्वर्टर के दो काम हैं: ग्रिड की बिजली से बैटरी चार्ज करना, और बिजली जाने पर उसी बैटरी से घर चलाना। इसमें सोलर इनपुट नहीं होता। यह जो भी बिजली देता है, वह पहले ग्रिड से ख़रीदी गई होती है, इसलिए बिल में कोई बचत नहीं होती। बल्कि बैटरी को चार्ज और डिस्चार्ज करने में थोड़ी बिजली बर्बाद होती है, तो बिल थोड़ा बढ़ ही जाता है।
हाइब्रिड इन्वर्टर क्या करता है
हाइब्रिड इन्वर्टर एक डिब्बे में तीन मशीनें हैं: इन्वर्टर, सोलर चार्ज कंट्रोलर (MPPT) और बैटरी चार्जर। दिन में यह इस क्रम में काम करता है:
- पहले सोलर: आपके उपकरण पैनल की बिजली से चलते हैं।
- बची हुई बिजली बैटरी में: ज़्यादा सोलर बिजली शाम के लिए बैटरी चार्ज करती है।
- ग्रिड सिर्फ़ ज़रूरत पर: जब सोलर और बैटरी कम पड़ें, जैसे रात में या बादल वाले दिन, तब ग्रिड से बिजली ली जाती है।
बिजली जाने पर यह अपने आप बैटरी और सोलर पर चला जाता है। PowerRun हाइब्रिड इन्वर्टर 10 ms में स्विच करते हैं, इतनी तेज़ी से कि कंप्यूटर और Wi-Fi राउटर रीस्टार्ट नहीं होते।
आमने-सामने तुलना
| नॉर्मल इन्वर्टर | हाइब्रिड इन्वर्टर | |
|---|---|---|
| सोलर पैनल | सपोर्ट नहीं (अलग कंट्रोलर चाहिए) | MPPT सोलर इनपुट अंदर ही |
| बिजली का बिल | कोई बचत नहीं | हर महीने कम, दिन में अक्सर लगभग शून्य |
| बिजली जाने पर बैकअप | हाँ, सिर्फ़ बैटरी से | हाँ, बैटरी और सोलर दोनों से |
| आम क्षमता | 600 VA - 2 kVA | 3.6 kW - 12 kW |
| AC, पंप, फ्रिज चलाना | आमतौर पर नहीं, या सिर्फ़ छोटे लोड | हाँ, भारी लोड के हिसाब से बना |
| बैटरी का प्रकार | ज़्यादातर लेड-एसिड (12 V / 24 V) | लिथियम (LFP) बेहतर |
| मॉनिटरिंग | साधारण LED या डिस्प्ले | LCD डिस्प्ले, अलग मॉड्यूल से Wi-Fi ऐप |
| शुरुआती कीमत | कम | ज़्यादा, पर बचत से अपनी कीमत वसूल कर लेता है |
क्या मैं अपने नॉर्मल इन्वर्टर में सोलर पैनल जोड़ सकता हूँ?
कुछ "सोलर-रेडी" नॉर्मल इन्वर्टर में छोटा सोलर चार्ज कंट्रोलर लग जाता है, पर उससे सोलर बिजली सिर्फ़ बैटरी चार्ज करती है। दिन में घर फिर भी ग्रिड की बिजली से चलता है, इसलिए बिल लगभग नहीं घटता। अगर मकसद बिल घटाना है, तो हाइब्रिड इन्वर्टर ही सही चुनाव है।
आपके लिए कौन-सा सही है?
नॉर्मल इन्वर्टर चुनें अगर
- छोटे पावर कट में बस कुछ लाइट और पंखे चलाने हैं।
- आप किराए पर रहते हैं और छत पर पैनल नहीं लगा सकते।
- अभी बजट बहुत कम है।
हाइब्रिड इन्वर्टर चुनें अगर
- आपका महीने का बिल ₹1,500-2,000 से ज़्यादा है और छत पर पैनल की जगह है।
- लंबे पावर कट में भी AC, पानी का पंप या फ्रिज चलता रहना चाहिए।
- आपके इलाके में बिजली कई घंटे जाती है।
- आपकी दुकान, क्लिनिक, ऑफ़िस या छोटी फ़ैक्टरी है, जहाँ काम रुकने से नुकसान होता है।
सही साइज़ कैसे चुनें
PowerRun हाइब्रिड इन्वर्टर छह साइज़ में आते हैं। 3.6 kW और 4.2 kW मॉडल 24 V लिथियम बैटरी पर चलते हैं और ज़्यादातर घरों के लिए सही हैं। 6.2 kW और उससे बड़े मॉडल 48 V पर चलते हैं और बड़े घरों व बिज़नेस के लिए हैं। कितने साइज़ का सोलर इन्वर्टर चाहिए वाली गाइड में उदाहरण के साथ हिसाब है, और लिथियम बनाम लेड-एसिड बताती है कि हाइब्रिड सिस्टम के लिए लिथियम बैटरी बेहतर क्यों है।
सीधी बात
नॉर्मल इन्वर्टर एक बैकअप मशीन है। हाइब्रिड इन्वर्टर भी बैकअप देता है, और साथ में हर महीने बिल घटाकर अपनी कीमत वसूल कर लेता है। अगर आपके पास छत है और बिल घटाना है, तो लंबे समय के लिए हाइब्रिड इन्वर्टर बेहतर ख़रीद है।
तय नहीं कर पा रहे कि आपके घर के लिए कौन-सा सही है? अपने उपकरणों की लिस्ट और पिछला बिजली बिल WhatsApp पर भेजिए, हम सही इन्वर्टर, बैटरी और पैनल का जोड़ बता देंगे। आप मुफ़्त कोटेशन भी माँग सकते हैं। यह गाइड अंग्रेज़ी में भी पढ़ें।
